नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था में मंदी का प्रभाव काफी हद तक कम हो गया है और वह अब आगे की तरफ बढ़ रही है। अब अर्थव्यवस्था में ग्रोथ की रफ्तार, विशेषकर के निजी निवेश में सरकार की ओर से की जाने वाली पहलों पर निर्भर करेगा। यह जानकारी एक रिपोर्ट के जरिए सामने आई है।
डन एंड ब्रेकफॉस्ट के मुताबिक नोटबंदी के बाद आई मंदी के कारण अर्थव्यवस्था के संदर्भ में कुछ मोर्चों (मानकों पर) पर सुधार दिखाई दिया है। डन एंड ब्रेकफॉस्ट इंडिया के प्रमुख अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने बताया, “हालिया अवधि में कुछ मोर्चों पर सुधार देखने को मिला है और हमें उम्मीद है कि इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में तेजी देखने को मिलेगी, विशेषकर के कैपिटल गुड्स सेग्मेंट में। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन त्यौहारी मांग से प्रेरित नहीं है और यह स्थायी आधार पर है।”
उन्होंने आगे कहा कि निर्यात में सुधार,मध्यम ब्याज दरें, निचले स्तर पर महंगाई, नियंत्रित व्यापार घाटा, बड़ा एफडीआई प्रवाह और राजकोषीय अनुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अर्थव्यवस्था को वर्तमान परिदृश्य से उबरने और सुधार की राह की ओर अग्रसर होने का मौका देगी।
डी एंड बी के नवीनतम इकोनॉमी ऑब्जर्वर के मुताबिक, भारत की मौलिक खपत जस की तस बनी हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पुनरुद्धार ने इसे और बढ़ावा देगा। सिंह ने कहा, “हमारा मानना है कि मंदी का दौर अब लगभग खत्म हो गया है, हालांकि अर्थव्यवस्था में सुधार का स्तर सरकार की उन पहलों पर निर्भर करेगा जिसे सरकार की ओर से लिया जाना है, ताकि ग्रोथ की रफ्तार को बढ़ावा दिया जा सके, खासकर के निजी क्षेत्र के निवेश को, जिसके बिना हम महात्वाकांक्षी ग्रोथ रेट पाने में सफल नहीं हो सकते हैं।”
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