सिद्धिविनायक का वार्षिक राजस्व रिकॉर्ड 133 करोड़ रुपये तक पहुंचा

मुंबई, भारत – एक प्रमुख हिंदू मंदिर और धार्मिक स्थल, सिद्धिविनायक मंदिर, का वार्षिक राजस्व इस वर्ष एक नई ऊंचाई तक पहुंच गया है। सिद्धिविनायक ट्रस्ट ने घोषणा की है कि उनका कुल वार्षिक राजस्व अब 133 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो कि पिछले साल की तुलना में एक रिकॉर्ड वृद्धि है। यह वृद्धि न केवल मंदिर के महत्व और लोकप्रियता को दर्शाती है, बल्कि धार्मिक पर्यटन और भक्तों की बढ़ती संख्या का भी संकेत है।

सिद्धिविनायक मंदिर का इतिहास और महत्व

सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई के प्रगति इलाके में स्थित है और यह भगवान गणेश को समर्पित है। यह मंदिर दुनिया भर से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है, जो विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के समय यहां आते हैं। यह मंदिर हिंदू धर्म में बहुत पवित्र और लोकप्रिय माना जाता है, और इसे एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में पहचाना जाता है। सिद्धिविनायक के दर्शन करने के बाद भक्तों को आशीर्वाद और समृद्धि की प्राप्ति का विश्वास होता है।

133 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व

सिद्धिविनायक ट्रस्ट ने हाल ही में अपने वार्षिक राजस्व के आंकड़े जारी किए, जिसमें यह साफ़ हो गया है कि 133 करोड़ रुपये का आंकड़ा मंदिर के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। पिछले वर्ष के मुकाबले, यह वृद्धि लगभग 20% की है, जो मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और भक्तों के योगदान को दर्शाती है।

इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि और श्रद्धा भाव से दी गई दान राशि है। पिछले साल की तुलना में भक्तों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, खासकर त्योहारों के दौरान। इसके अलावा, मंदिर प्रशासन ने अपने वित्तीय प्रबंधन में भी सुधार किया है, जिससे अधिकतम लाभ का अर्जन हो रहा है।

मंदिर के विकास कार्य

सिद्धिविनायक ट्रस्ट ने अपने राजस्व का उपयोग मंदिर के विकास कार्यों के लिए भी किया है। इनमें नए भवनों का निर्माण, भक्तों के लिए सुविधाओं का विस्तार, और धार्मिक सेवाओं में सुधार शामिल हैं। इस राजस्व का एक हिस्सा स्थानीय सामुदायिक कार्यों और धर्मार्थ परियोजनाओं में भी लगाया जाता है, ताकि मंदिर का सामाजिक दायित्व भी पूरा हो सके।

भक्तों की भूमिका

सिद्धिविनायक मंदिर के राजस्व में वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा यहां आने वाले भक्तों के योगदान से आता है। भक्त अपनी श्रद्धा और आस्था के साथ दान करते हैं, जिससे मंदिर को न केवल धार्मिक कार्यों के लिए वित्तीय समर्थन मिलता है, बल्कि समाज में कल्याणकारी कार्यों के लिए भी पैसे जुटाए जाते हैं।

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