झारखंड में NTPC मालगाड़ियों की आमने-सामने टक्कर में 2 लोको पायलटों की मौत, 4 घायल
झारखंड के एक भीषण रेल हादसे में दो मालगाड़ियों की आमने-सामने टक्कर हो गई, जिससे दो लोको पायलटों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। यह दुर्घटना NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन) द्वारा संचालित मालगाड़ियों के बीच हुई। घटना रांची से कुछ किलोमीटर दूर स्थित एक रेलवे ट्रैक पर हुई, जहां दोनों गाड़ियां तेज गति से एक-दूसरे से टकरा गईं।
हादसा कैसे हुआ?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा तब हुआ जब दोनों मालगाड़ियां एक ही ट्रैक पर एक-दूसरे के सामने आ गईं। दोनों गाड़ियां भारी मालवाहन लेकर जा रही थीं और अचानक सामने आ जाने के कारण लोको पायलटों के पास प्रतिक्रिया करने का समय नहीं था। तेज गति के कारण दोनों गाड़ियों की टक्कर बहुत भीषण थी। टक्कर की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, और पूरा इलाका दहशत में आ गया।
लोको पायलटों की मौत और घायल हुए लोग
इस हादसे में दो लोको पायलटों की मौके पर ही मौत हो गई। उनका शरीर गाड़ी के भीतर बुरी तरह से फंसा हुआ था, जिसे निकालने में बचाव दल को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। वहीं, चार अन्य लोग घायल हो गए, जिनमें से कुछ को गंभीर चोटें आईं। घायल यात्रियों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
रेलवे अधिकारियों ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और माना जा रहा है कि यह हादसा ट्रैक पर सिग्नल प्रणाली में कोई गड़बड़ी या तकनीकी खराबी के कारण हो सकता है। हालांकि, अधिकारी घटना की सही वजह का पता लगाने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए हैं।
NTPC का बयान
इस घटना के बाद, NTPC ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि कंपनी अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को अत्यधिक महत्व देती है और वह इस हादसे की पूरी जांच करेगी। कंपनी ने हादसे में जान गंवाने वाले लोको पायलटों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की और उन्हें हर संभव सहायता देने का वादा किया।
NTPC ने यह भी कहा कि वह रेलवे के साथ मिलकर इस हादसे के कारणों की जांच करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह हादसा रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। रेलवे के ट्रैक पर इस तरह की घटनाएं दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा उपायों को और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए ताकि इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके। खासकर, सिग्नल सिस्टम और ट्रेन ट्रैकिंग सिस्टम को आधुनिक और सटीक बनाने की जरूरत है, ताकि ट्रेनें एक दूसरे के पास आने से पहले एक दूसरे के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें।
बचाव कार्य और राहत प्रयास
घटना के तुरंत बाद, बचाव दल ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। ट्रैक पर क्षतिग्रस्त गाड़ियों को हटाने और ट्रेन सेवाओं को बहाल करने के लिए रेलवे कर्मचारियों ने काम शुरू किया। इसके अलावा, घायल व्यक्तियों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और उन्हें अस्पताल भेजा गया। रेलवे विभाग ने भी इलाके में यातायात बहाल करने के लिए काम तेज कर दिया।
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