पूज्य सद्गुरुदेव आशिषवचनम्
।। श्री: कृपा ।।
पूज्य “आचार्यश्री जी” ने कहा कि शिवरात्रि सनातन धर्म का महान पर्व है।महाशिवरात्रि का पर्व परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण का मंगलसूचक है। उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही महाशिवरात्रि कहलाती है। वह हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर आदि विकारों से मुक्त करके परम सुख, शान्ति, ऐश्वर्यादि प्रदान करते हैं। शिवरात्रि शिवत्व प्रदान करती है। पूरी धरती पर प्राकृतिक उत्सव चल रहा है। परमात्मा प्रकट होने को व्याकुल हैं। सारे देवता प्रकट होना चाहते हैं। पत्थर से बाहर आना चाहते हैं, किन्तु उसके लिए आपसे अपेक्षित है – श्रेष्ठता, पावित्र्य, उदारता जैसे सद्गुण। हम जितना विनम्र होंगे, प्रभु उतना ही हममें प्रकट होंगे। जब भक्ति जगती है तब औदार्य आता है। जो जितना उदार है, वो प्रभु के उतना ही निकट है। उत्सव उच्चता के प्रसव को कहते हैं, इस दिन प्रकृति पूरे आनंद में होती है, देवता भी प्रसन्न रहते हैं। प्रसन्नता का प्रसाद ही उत्सव है। पारदेश्वर महादेव उत्सवमूर्ति हैं। आज के दिन हर कण में ईश्वर के दर्शन करने चाहिए, तभी उत्सव का मंगल आशीर्वाद प्राप्त होता है…।
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