मध्यप्रदेश : कांग्रेस ने भी बंगलूरू में ठहरे अपने विधायकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा

न्यूज़ डेस्क : मध्यप्रदेश में जारी सियासी संकट के बीच कांग्रेस ने भी बंगलूरू में ठहरे अपने विधायकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। पार्टी ने मंगलवार को इन विधायकों से संवाद के लिए संपर्क साधने की मंजूरी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार को निर्देश देने की गुहार लगाई है। 

 

जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में सियासी घमासान को लेकर अब कांग्रेस ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर भाजपा पर आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में फ्लोर टेस्ट संभव नहीं है क्योंकि उसके16 विधायकों को बंगलुरू में बंधक बनाकर रखा गया है। 

कांग्रेस ने अपनी याचिका में कहा है कि फ्लोर टेस्ट तभी संभव है जब सभी चुने हुए विधायक विधानसभा में उपस्थित रहें। कांग्रेस का कहना है कि उसके22 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में विश्वास मत तभी संभव है जब उन विधानसभा क्षेत्रों में फिर से चुनाव नहीं हो जाते। याचिका कर्नाटक में कांग्रेस के मुख्य सचेतक गोविंद सिंह ने दायर की है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में दखल देने की गुहार की है। 

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार से भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर बुधवार को जवाब देने को कहा। शिवराज ने कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य विधानसभा में तत्काल बहुमत परीक्षण की मांग की है।

कांग्रेस पार्टी ने अपनी याचिका में कोर्ट से आग्रह किया है वह केंद्र सरकार, कर्नाटक सरकार और भाजपा राज्य इकाई द्वारा उसके विधायकों को बंगलूरू में रखने को गैर कानूनी ठहराए। याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि वह बागी विधायकों को चल रहे बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति के लिए एक निर्देश जारी करें। 

विधायक गोविंद सिंह ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक द्वारा दायर याचिका में कहा कि विश्वास मत केवल राज्य विधानसभा के सभी निर्वाचित विधायकों की उपस्थिति में होना चाहिए।

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