वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 लोकसभा से पारित: वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े बदलाव

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,4 अप्रैल।
वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 हाल ही में लोकसभा में पारित हो गया। यह विधेयक मौजूदा वक्फ कानून में कई अहम संशोधन करता है, जो वक्फ संपत्तियों की निगरानी, प्रशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के इरादे से लाए गए हैं।

विधेयक का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि अब केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की जा सकेगी। इस पहल का उद्देश्य प्रबंधन में विविधता लाना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इससे वक्फ संपत्तियों की देखरेख में निष्पक्षता आएगी।

नए कानून के तहत सरकार को विवादित वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व का निर्धारण करने का अधिकार दिया गया है। यह कदम वक्फ संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को रोकने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है। इससे कई वर्षों से लंबित संपत्ति विवादों का समाधान भी तेज़ी से हो सकेगा।

विधेयक के अनुसार, मौजूदा वक्फ संपत्तियों को छह माह के भीतर एक नामित पोर्टल पर विस्तृत जानकारी सहित दर्ज कराना अनिवार्य होगा। इससे न केवल संपत्तियों का रिकॉर्ड पारदर्शी होगा, बल्कि सरकारी निगरानी भी आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल ट्रैकिंग और जवाबदेही में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।

विधेयक के तहत “वक्फ अधिनियम, 1995” का नाम बदलकर “एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995” रखने का प्रस्ताव है। यह नाम इस बात को रेखांकित करता है कि सरकार अब वक्फ प्रबंधन को केवल धार्मिक सीमाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे प्रशासनिक और विकासोन्मुख बनाना चाहती है।

विधेयक मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 को निरस्त करने का भी प्रस्ताव करता है। इससे पुराने और नए कानूनों के बीच के टकराव को समाप्त करने और एक समान ढांचे के तहत वक्फ संपत्तियों का संचालन सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

विधेयक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। जहां एक ओर कुछ वर्ग इसे सुधारात्मक कदम मानते हैं, वहीं कुछ संगठनों ने इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति और सरकारी हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह विधेयक सभी नागरिकों के हित में पारदर्शी और उत्तरदायी वक्फ प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।

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