वक्फ काउंसिल में 4 गैर-मुस्लिम, 2 महिलाएं शामिल होंगी: किरेन रिजिजू ने संसद में किया बड़ा ऐलान

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,2 अप्रैल।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में संसद में वक्फ बिल पर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की और कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम और महिलाओं को जगह देने की बात की, जो इस बिल का एक बड़ा हिस्सा है। रिजिजू के इस बयान ने संसद में हड़कंप मचा दिया और यह चर्चा का विषय बन गया।

किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ काउंसिल में सुधार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 22 सदस्यों वाली काउंसिल में से 10 सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे। इसके अलावा, वहाँ 4 गैर-मुस्लिम सदस्य भी शामिल किए जाएंगे, जिनमें से 2 महिलाएं भी शामिल होंगी। पिछले काल में वक्फ काउंसिल में केवल मुस्लिम समुदाय के लोग ही शामिल होते थे, लेकिन इस बिल के तहत गैर-मुस्लिमों को भी समान प्रतिनिधित्व मिलेगा। इस कदम के लिए यह माना जा रहा है कि सरकार का उद्देश्य वक्फ संस्थाओं में पारदर्शिता और समावेशिता बढ़ाना है।

रिजिजू ने इसके अलावा भी स्पष्ट किया कि वक्फ बनाने के लिए किसी व्यक्ति को 5 वर्ष तक इस्लामी प्रैक्टिस की शर्त होगी। इस बात ने विपक्षी दलों से भी आलोचनाएँ उत्पन्न कीं, मगर मंत्री ने इसे धार्मिक प्रथाओं के अनुरूप कदम बताया। उन्होंने तर्क दिया कि सरकारी द्वारा संचालित संस्थाएँ वक्फ, ये वृद्ध और कर्जतेज लोगों के संघीयक वर्गों और धर्मांतरितों के डोमेन को भी ध्यान में रखकर काम करेंगी।

केंद्रीय मंत्री ने उस समय वक्फ प्रॉपर्टी पर भी कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि वक्फ प्रॉपर्टी के पास इतनी अधिक संपत्ति होने के बावजूद भारत के मुसलमानों की स्थिति क्यों कमजोर है। उन्होंने यह सवाल भी किया कि जब वक्फ के पास इतनी संपत्ति है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका लाभ मुसलमानों तक पहुंचे।

उन्होंने यह कहा, “वक्फ प्रॉपर्टी निजी संपत्ति होती है और इसके प्रबंधन में पारदर्शिता की जरूरत है। सरकार इसका सुधार करना चाहती है ताकि इसका सही तरीके से उपयोग किया जा सके।”

कांग्रेस पार्टी पर भी आड़े हाथों लेते हुए वक्फ बिल पर बोलते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि यूपीए सरकार ने 2014 के चुनाव से ठीक पहले दिल्ली के 123 प्रमुख वक्फ प्रॉपर्टी को वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया था, ताकि मुस्लिम वोटों को आकर्षित किया जा सके। लेकिन, रिजिजू के अनुसार, इसके बावजूद कांग्रेस उस चुनाव में हार गई।

उन्होंने यह भी बताया कि यह वक्फ प्रॉपर्टी देश की है और इसे सार्वजनिक हित में सेवा करना चाहिए। उनका विश्वास था कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति का सही और उचित तरीके से प्रबंधन किया जाना चाहिए, ताकि यह मुसलमानों के विकास में सहायक साबित हो।

रिजिजू ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को इस बिल के बारे में भी साझा किया। उनका कहना था कि जो प्रॉपर्टी पहले से रजिस्टर्ड हो चुकी है, उस पर कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। सरकार उन विवादित प्रॉपर्टीज में कोई दखल नहीं देगी जो कोर्ट में पेंडिंग हैं। वक्फ केवल उस प्रॉपर्टी पर होगा, जो किसी का सौ फीसदी अपना हिस्सा है और इसमें महिला और बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल में 3 सदस्य होंगे और उनका कार्यकाल 6 साल का होगा। इसके अलावा, सरकारी जमीन और विवादित जमीन को लेकर कलेक्टर से ऊपर कोई अधिकारी फैसला करेगा। आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए, वक्फ प्रॉपर्टी शेड्यूल 5 और शेड्यूल 6 क्षेत्रों में नहीं बनाई जा सकेगी।

वक्फ बिल के तहत किए जा रहे इन सुधारों पर जहां सरकार की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, वहीं विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक रूप से देखें तो यह बिल एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जो वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता और समावेशिता लाने का प्रयास कर रहा है। अब देखना होगा कि वक्फ काउंसिल में किए गए इन बदलावों का भारतीय समाज और मुस्लिम समुदाय पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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