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पूनम शर्मा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लंदन दौरे ने हाल ही में मीडिया और सोशल मीडिया पर बहुत चर्चा बटोरी। यह दौरा विशेष रूप से उस समय शुरुआत में सुर्खियों में आया जब समाचार आने के बाद आईं कि ममता बनर्जी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एक महत्वपूर्ण व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन असलियत कुछ और ही सामने आई, और यह दौरा एक विवाद का कारण बन गया।ममता बनर्जी के लंदन दौरे की शुरुआत सोशल मीडिया पर तेज़ी से हुई। मीडिया ने यह जानकारी दी कि ममता जी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एक प्रतिष्ठित मंच पर व्याख्यान देने के लिए बुलाया गया था, और उनका उद्देश्य वहां से निवेश आकर्षित करना था। बंगाली मीडिया ने इसे बहुत चढ़ाकर बताया, और इसे ममता जी के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा के रूप में पेश किया। लेकिन वास्तविकता यह थी कि ममता बनर्जी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से कोई निमंत्रण नहीं मिला था, बल्कि एक अन्य कॉलेज से आमंत्रण आया था। इसके बावजूद मीडिया में इसे बहुत बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया, जो इस यात्रा को लेकर भ्रम पैदा करने का कारण बना।
ममता बनर्जी के लंदन यात्रा के दौरान एक अन्य घटना ने सुर्खियों में रहीं। वह हाइट पार्क घूमने गईं, जहां उनका घूमना-फिरना और बाद में धरना प्रदर्शन की खबरें आईं। इस घटना पर मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं हुईं, जिसमें कहा गया कि ममता जी ने लंदन में भारतीय मुद्दों को लेकर विरोध जताया और यह भी कहा गया कि उनका प्रदर्शन कुछ खास कारणों से हुआ था।
इस धरने पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि ममता बनर्जी ने इस ढंग के प्रदर्शन की आवश्यकता क्यों महसूस की, और क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा था? यह गद्दारी उन लोगों के लिए हैरान करने वाली थी, जो ममता जी को एक और संदर्भ में देख रहे थे। हालांकि, इस धरने की असली वजह क्या थी, यह अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है।
मीडिया में यह खबर आई थी कि ममता बनर्जी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से महत्वपूर्ण भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन वास्तविकता यह थी कि इस तरह का कोई निमंत्रण नहीं था। ममता जी को जिस कॉलेज में आमंत्रित किया गया था, वह ऑक्सफोर्ड नहीं था। इसके बावजूद, इस खबर को फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई और सोशल मीडिया पर इस बात को बढ़ा-चढ़ाकर प्रकाशित किया गया।
यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स कैसे किसी घटनाक्रम को ज्यादा बढ़ा-चढ़ा करके पेश करते हैं, जो असल में पूरी तरह से सच्चाई पर आधारित नहीं होता। इसके अलावा, लंदन में ममता बनर्जी के साथ मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों की संख्या भी इस भ्रम को और बढ़ा देती है, क्योंकि वहां ज्यादातर भारतीय ही थे जो इस कार्यक्रम में शामिल थे।
इस कार्यक्रम का आयोजन लंदन में किया गया था, और इस कार्यक्रम में अधिकांश दर्शक भारतीय थे, और उन्होंने ममता बनर्जी के कार्यों का समर्थन किया। वहाँ के स्थानीय लोग और अन्य देशों से आए लोग इस कार्यक्रम में उतनी बड़ी संख्या में शामिल नहीं हुए थे। इससे यह साफ होता है कि यह कार्यक्रम और प्रदर्शन मुख्य रूप से भारतीय समुदाय के बीच ही सीमित था।
इस तरह की घटनाओं को देखकर यह भी समझ आता है कि भारतीय राजनीति, विशेष रूप से बंगाल की राजनीति, ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जगह बनानी शुरू कर दी है। ममता बनर्जी के लंदन दौरे और वहां के प्रदर्शन ने यह सिद्ध कर दिया कि विपक्ष के भारतीय नेता राहुल गांधी की तर्ज पर अब अपने देश से बाहर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
ममता बनर्जी का लंदन यात्रा एक रोचक घटनाक्रम था, जिसने भारतीय राजनीति और मीडिया दोनों को एक नए दृष्टिकोण से दिखाया। अन्ततः, हालांकि, मीडिया में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही नहीं थी। ममता जी को ऑक्सफोर्ड से कोई निमंत्रण नहीं मिला था, और धरना प्रदर्शन भी एक अलग कारण पर हुआ था। ये घटनाएँ होते ही यह सवाल उठता है कि यह क्या था – राजनीति का हिस्सा या एक संयोग? फिर भी, यह साफ है कि ममता बनर्जी की लंदन यात्रा ने मीडिया, राजनीति और भारतीय समुदाय के बीच चर्चा को जन्म दिया है ।
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