जीतनराम मांझी के कार्यक्रम में सिर्फ 15 सेकंड बोलकर निकल गए नीतीश… क्या NDA में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा?
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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,28 फरवरी। बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज़ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया व्यवहार ने एक बार फिर चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) प्रमुख जीतनराम मांझी के एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार सिर्फ 15 सेकंड तक बोले और तुरंत मंच से उतर गए। उनके इस रवैये ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा?
नीतीश कुमार का ’15 सेकंड का भाषण’—क्या है मामला?
जीतनराम मांझी की पार्टी हम के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने सिर्फ 15 सेकंड में अपना भाषण समाप्त कर दिया और वहां से चले गए। उनके शब्द थे—
“आप सभी को नमस्कार! मैं बस यही कहने आया हूं कि हम सब साथ मिलकर काम कर रहे हैं। धन्यवाद!”
नीतीश कुमार के इस अचानक रवैये ने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। आमतौर पर बड़े नेताओं के भाषण लंबे होते हैं, लेकिन नीतीश का इतनी जल्दी मंच छोड़ देना एनडीए में अंदरूनी मतभेदों के संकेत दे रहा है।
क्या नीतीश NDA से असंतुष्ट हैं?
नीतीश कुमार के इस व्यवहार को लेकर कई राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग कयास लगा रहे हैं—
- क्या बीजेपी से उनकी नाराजगी बढ़ रही है?
- क्या मांझी और नीतीश के बीच कोई अनबन है?
- क्या जेडीयू फिर से कोई नया राजनीतिक दांव खेल रही है?
कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार एनडीए में अपनी भूमिका को लेकर असंतुष्ट महसूस कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए जेडीयू और बीजेपी के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनाव हो सकता है।
मांझी और नीतीश के रिश्तों में दरार?
जीतनराम मांझी कभी नीतीश कुमार के बेहद क़रीबी माने जाते थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके बयानों से यह साफ हो चुका है कि वह अब पूरी तरह बीजेपी के करीब हैं। मांझी पहले ही कह चुके हैं कि “बिहार में अगला मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा।” यह बयान जेडीयू के लिए एक बड़ा झटका था।
नीतीश कुमार ने इस बयान पर अब तक कोई खुली प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके ’15 सेकंड भाषण’ को उनके असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं?
बिहार में एनडीए गठबंधन में पहले ही चिराग पासवान की वापसी और सीट शेयरिंग को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में नीतीश कुमार का यह नया अंदाज बीजेपी के लिए भी चिंता का विषय हो सकता है।
अगर जेडीयू और बीजेपी के बीच तनातनी बढ़ती है, तो बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
नीतीश कुमार का जीतनराम मांझी के कार्यक्रम में सिर्फ 15 सेकंड में भाषण खत्म कर देना राजनीतिक संकेतों से भरा हुआ है। यह घटना बिहार की राजनीति में आगामी बदलावों का इशारा कर रही है। क्या नीतीश कुमार फिर से कोई ‘पलटीमार’ राजनीति करने जा रहे हैं या यह सिर्फ एक संयोग था? इसका जवाब आने वाले दिनों में मिल जाएगा!
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