गुजरात के बनासकांठा में पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग, 17 मजदूरों की दर्दनाक मौत

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फैक्ट्री में काम चल रहा था कि अचानक वहां विस्फोट हुआ और आग तेजी से फैल गई। फैक्ट्री में ज्वलनशील सामग्री की अधिकता के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के वक्त फैक्ट्री में कई मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से अधिकांश भागने का मौका भी नहीं पा सके।

दमकल विभाग को आग बुझाने में कई घंटे लगे। दमकल अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में रखे केमिकल और बारूद के कारण आग तेजी से फैलती रही, जिससे बचाव कार्य में काफी कठिनाई आई।

स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि अब तक 17 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं। घायलों को बनासकांठा के सिविल अस्पताल और अन्य नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कई शव बुरी तरह जल चुके हैं, जिससे उनकी पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा है। पुलिस ने डीएनए जांच के जरिए शवों की शिनाख्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जाहिर की। उन्होंने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और मृतकों के परिवारों को मुआवजे के रूप में ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता राशि देने की घोषणा की है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह जांच की जा रही है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ लापरवाही और गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। यदि सुरक्षा उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह पहली बार नहीं है जब पटाखा फैक्ट्री में इस तरह की आग लगी हो। देशभर में इससे पहले भी कई ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पटाखा निर्माण इकाइयों में सुरक्षा मानकों को लेकर अधिक सख्ती की जरूरत है।

बनासकांठा की यह घटना एक बार फिर पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा चूक को उजागर करती है। प्रशासनिक जांच और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों से यह साफ होगा कि दोषियों को कब तक सजा मिलेगी, लेकिन इस हादसे ने कई परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। अब सवाल यह है कि क्या भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, या फिर ऐसी घटनाएं लगातार होती रहेंगी?

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